मित्रों जब से हमने अपने टाइटल में भारशिव क्षत्रिय भरतवंशी  और सूर्यवंशी  लिखा है हमारे कई मित्रों ने सवाल किया है की भर राजभर जाति क्या सूर्यवंशी हैं मैं आपको आप ही के सवाल का समाधान लिखता हूं जब श्री राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद का विवाद ढांचा विध्वंस होने के 28 सालों बाद जो विवाद पर माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया वह 1045 पेज के फैसले मैं पेज नंबर 1003 पर यह लिखा गया की बहराइच फैजाबाद सुल्तानपुर  गजेटियर आफ अवध एवं  आर्कियोलॉजिकल लॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को साक्ष्य को फैसला का  आधार माना गया है पेज संख्या 119 पर गजेटियर आप फैजाबाद के अनुसार भर ट्राईब्सजो के रुप में आदिम राजपूत जाति के राजाओं ने सन 400 ईसवी से 1400 ईस्बी तक अयोध्या, फैजाबाद, सुल्तानपुर, बहराइच, गोंडा रायबरेली, मिर्जा पुर इत्यादि निकटवर्ती क्षेत्रों पर निर्रबिबाद शाशन किये है और इस शासन अवधि के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में इनका प्रभुत्व विभिन्न गजेटियर में दर्ज हैं। अयोध्या की पवित्र भूमि पर शासन करने का स्पष्ट प्रमाण उल्लखितहै। इस फैसले के पेज संख्या 152 पर लिखा गया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा राजपत्रित प्रकाशित किए जाते हैं जिसमें साक्ष्य मूल्य सबूत होता है अर्थात जितने गजेटियर सरकार प्रकाशित कराती है वो सब कानूनी सबूत है। पेज़ संख्या 1003 के फैसले मैं लिखा है गजेटियर आफ अवध, गजेटियर आफ बहराइच, गजेटियर आफ गोंडा गजेटियर आफ सुल्तानपुर गजेटियर आफ फैजाबाद तथा तथा आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के सबूतों को धारा 57 के अंतर्गत नकारा नहीं जा सकता। पेज़ संख्या 117 पर फैसले के अनुसार प्रोविंस आफ अवध को मान्यता दे रहा है। 1---पेज़ संख्या 119   फैसले के अनुसार 18 89 में प्रकाशित पुरातत्व अन्वेषण विभाग गजेटियर आप फैजाबाद को मान्यता दे रहा है।जिन सरकारी दस्तावेजों का  जिक्र किया गया है उसमें सुल्तानपुर गजट ईयर का पेज संख्या 119 गजेटियर आफ फैजाबाद  के अनुसार पवित्र अयोध्या श्री राम जन्मभूमि कास्थान लोकप्रिय किंवदंतियों के अनुसार श्री राम और उनके परिवार और जीवन के या भर ट्राइब के साथ जुड़ा है।2-अयोध्या के पूर्वी हिस्से में बांदा जिले में व्यापक पहाड़ी किले हैं जो विल्टम ओलघम सहायक मजिस्ट्रेट साइकलोपेन आयामों की सूचना देते हैंऔर भर ट्राईब्स इसके ज़िम्मेदार हैं।(रायल एसियाटिक सोसायटी आफ इंडिया।)3-यह आरंम्भिक काल से लेकर मुस्लिम काल तक सुल्तानपुर तथा कस्बा कुशभावनपुर भरो का एक बहुत बड़ा गढ़ था।उसी गवाही पर हमारे विश्वास करने के लिए कहा जाता है।कि इसकी स्थापना कुश द्वारा की गई थी जो श्री राम जी के पुत्र थे। भूमि राजस्व रिपोर्ट सुल्तानपुर सेंटिलमेंट4-द भर ट्राइब यह जाति जिसे भर राजभर भार, भरपटवा के नाम से जाना जाता हैं गोरख पुर से लेकर मध्य प्रदेश में गंगौर तक  विस्तृत रुप से बसी थीं वे अवध में बहुत ही शक्तिशाली थे।इनके किले जिन्हें भरडीह या कोट कहा जाता है जिनमें कुछ विशाल आकार के हैं और उनके पास गहरी खुदाई करने का श्रेय है एशियाटिक सोसाइटी आप इंडिया को फैजाबाद कि आसपास और कई टिले मिले हैं जिसका श्रेय भरो को दिए गए हैं चतरबंन फैजाबाद एक कृत्रिम टिला है ऊंची ईंटों और कंकर के खंडों से ढका है पुरानी ईट 11इंच चौकोर और 3 इंच मोटी हैपेज संख्या 298पर ,,,, अकबरपुर फैजाबाद से22मील दक्षिण पूर्व में परगना में खंडहर ईंट के टिले है जो सिरवा-पाली गांव में भरो द्वारा बनवाया गया है। पृष्ठ संख्या 302,,‌ फैजाबाद के दक्षिण पूर्व में 86 मील दूरी पर सुरहुरपुर में एक ऊंचे मैदान में एक चिनाई का किला है जिसे भरो के नाम से जाना जाता है। और बैसो ने भर जाति को उखाड़ फेंका। संख्या 302, फैजाबाद से दक्षिण पूर्व में टांडा मदारपुर मैं काफी हद तक इंट के के किले बने हुए हैं जो भरो के हैं अभी तक फैले हुए हैं पेज़ संख्या 302 अकबरपुर फैजाबाद से 36 किलोमीटर दक्षिण पूर्व अकबर का किला एक भारमल महल के खंडहरों केऊपर बनाया गया था पेज़ संख्या300, आमामीन फैजाबाद से 22मिल  दक्षिण पूर्व परगना जो खंडहरों ईटों के टीले हैं सिरवा- पाली भरो का बनाया गया हैआ जाता है सिरवा प्राचीन अयोध्या का पूर्वी द्वार है बिरहर अयोध्या से 50 मील दक्षिण पूर्व में परगना मैं प्राचीन किले और कोट है जिन्हें भरो द्वारा बनाया गया है पेज संख्या 301,, तहसील फैजाबादसे 9 मील की दूरी पर मंगलसी पश्चिम में किले जो भरो द्वाराबनाए गए हैं। पेज़ 302 फैजाबाद से 25 मील दक्षिण पश्चिम में खसडा। ईटों से बने किले कोट भरो द्वारा निर्मित है पेज संख्या 302 कुश भावनपुर यहां भर राजा लोग सुल्तानपुर के अलाउद्दीन खिलजी के समय राज्य करते थे मुस्लिम सेना ने भरोसे यु किया और जिले का नाम बदल दिया !भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग,,देश(अयोध्या), भरों के प्रमुखों  के अधिकार में था जो कुशभावन पुरया कुसापुरमें रहते थे जो सुल्तानपुर का पुराना नाम है (फैजाबाद गजेटियर ) हालांकि भरो नेअयोध्या में अपना कब्जा जमा रखा था जोआक्रमणकारियोसे लड़ते रहे। मुसलमानो को एक- एक  नये नगरमें रहने को मजबूर किया था। क्योंकि भरो ने उन्हें अयोध्या नगर में रहने की अनुमति नहीं दी थी। लगातार उनपर हमला किया जबकि उनपर भी हमला किया गया( डिस्ट्रिक्ट स्केच आफ फैजाबाद) मिस्टर पैट्रिक करनेगी ने अपने। डिस्ट्रिक्ट स्केच आफ फैजाबाद में भर ट्राइब के द्वारा किए गए सफ ल छापों का एक बिशेष बिबरण देता है अवाध के सम्मान कर्ता भरो को  डब्ल्यूपी करने की फैजाबाद के डिप्टी कमिश्नर टिप्पणी करते हैं कि हमारे पूर्व  चिनाई वाले किलो के खंडहरों को हमारे जिले में पता लगाया स्कोर द्वारा पता लगाया जाना है। उस राजा डल भर और डलमऊ के राजा बल भर और रायबरेली उनके पास एक ही जगह पर किले थे जबकि दो कम प्रसिद्ध भाई कपूर भर और भवन भर को सुंदनपुर में बसाया गया था WC benett  C S ।gazeiear Raibareley Resemble  of Regious  gods Regious। Finds place पारंपरिक रूप से ,शैव थे और भगवान शिव तथा चंडिका की पूजा करते थ (गजेटियर आफ अवध) अवध के नर नारियों ने अमरता और दिव्यता  पाने के लिए भगवान श्री राम जी के साथ सरजू नदी में पवित्र डुबकी ( जल समाधि) ली और अयोध्या छोड़ दी गई हालांकि भगवान श्री राम ने वानरों (वन जनजातियों) वह अपने साथ आने से मना किया सन्दर्भ- श्री बाल्मीकि रामायण, पदम् पुराण।जब पर्दा फिर से उड़ता है तो हम देखते हैं कि अयोध्या पूरी तरह से नष्ट हो गई है सूरज वंश पूरी तरह से गायब हो गया हैं और देश के एक बड़े हिस्से पर आदिवासियों का शासन हो गया है जिसे सुदूर पूर्व में चेरू कहा जाता है मध्य में भर ट्राइव थे। सी ए इलियट इतिहास उन्नाव,,, उज्जैनी के विक्रमादित्य के समय सुनसान पड़ा रहा भार शिव परंपरा के अनुसार पवित्र नगर की खोज में आए थे। रामगढ़ नामक एक किले की स्थापना की और जंगल को काट दिया जिसके उपरांत उन्होंने अयोध्या में राजमहलों का जीर्णोद्धार पवित्र मंदिरों का निर्माण जलाशयों का निर्माण बाग लगवाने तथा राहगीरों के लिए सराय का निर्माण कराया उसके पश्चात ग्यारहवीं शताब्दी में जब दुर्दांत आक्रांता भय और आतंक का प्रतीक आतताई जुल्मी इस्लामिक जेहादी  सैयद सालार मसूद गाजी मियां  ने श्री रामचंद्र जी केपवित्र जन्मभूमि कनक मंदिर को तोड़ा तब उस समय श्रावस्ती बहराइच की नरेश हिंदू हृदय सम्राट भारशिव सूर्यवंशी क्षत्रिय  सुहेलदेव राजभर जी ने 18 दिनों के घोर संग्राम में उसकी 1,20000 सेना को बहराइच के नानपारा मैदान में कोटिला नदी के किनारे मार गिराया और उसके भारत के इस्लामीकरण करने के गलत मंसूबों पर पानी फेर दिया था और उस वीर सपूत में राम जन्मभूमि और हिंदुत्व की लाज बचाई थीउनके स्वर्गारोहण के पश्चात उनके पपोत्र  नयचंद ने अयोध्या तथा श्री राम जन्म भूमि मंदिरका पुनर्निर्माण किया था भर जाति के बंशी होने का सबसे बड़ा प्रमाण सेंसस आफ इंडिया 18 91 आप द नादर्न प्रोविंसेस आफ अवध  part lll  xxx v lll By Dc Vaillie I C S  द्वारा भर जाति को क्रमांक ,116 रघुवंशी तथा क्रमांक फट148 पर सूर्यवंशी अंकित है जिसको सुख माननीय सुप्रीम कोर्ट भी साक्ष्य के रूप में मानता है। कलम से भारशिव सम्राट सुहेलदेव राजभर जी के जन्म जयंती के पूर्व संध्या पर समाज को उनकी श्रद्धांजलि तथा सम्मान  में समर्पित- 

                                                                                                मिस्टर कैलाश नाथ राय भरतवंशी