प्राचीन राजपूताना गौरव को सुरक्षित करने के लिए क्षत्रिय /राजपूत समुदायों के बीच एकता का पुनर्जन्म। आजकल क्षत्रिय/राजपूत समुदायों के बीच एकता की कमी के कारण दिन-प्रतिदिन घटते राजपुताना गौरव को देखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिकांश सभी राजपूत समुदाय हमारी राजपुताना संस्कृति / रीति-रिवाजो…
Read moreREINCARNATION OF UNITY AMONG KHATRIYA/ RAJPUT COMMUNITIES TO SECURE THE ANCIENT RAJPUTANA GLORY. It is highly unfortunate to glance the diminishing Rajputana Glory day by day due to the lack of unity among the Kshatriya / Rajput communities now a days. All most all the Rajput communiti…
Read more#भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ा तो उनका #अंतिम संस्कार किया गया , उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था , उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़…
Read moreविजय दिवस / हिंदुत्व का सबसे बड़ा विजय दिवस / - भारतवर्ष और श्रावस्ती के भूले हुए भारशिव राजपूत राजा श्री सुहेलदेव जी महाराज यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्र भारत के साथ-साथ उसके लोग भी प्राचीन भारत के असली नायक को भूल गए हैं, जिसने इस तारीख से लगभग 987 साल पहले भारतीय धरती पर लड…
Read moreमित्रों जब से हमने अपने टाइटल में भारशिव क्षत्रिय भरतवंशी और सूर्यवंशी लिखा है हमारे कई मित्रों ने सवाल किया है की भर राजभर जाति क्या सूर्यवंशी हैं मैं आपको आप ही के सवाल का समाधान लिखता हूं जब श्री राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद का विवाद ढांचा विध्वंस होने के 28 सालों बाद जो विवाद पर माननी…
Read moreराजभर इंसान की एक श्रेणी है। प्राचीनकाल मे इनके वंश मे काफी बलशाली, धर्मात्मा एवं विदेशी आक्रमणकारी आततायियों के दांत खट्टा करने, एवं उन्हें उन्ही की भाषा समझा कर उनके देश मरे हुये हालत मे भेजने वाला राजा पैदा हुए। राहुल सांकृतायन की पुस्तक सप्तमी के बच्चे के अनुसार राजभर भरत कुल के है,…
Read moreविभिन्न संसाधनों के साथ उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों से इसका सटीक विश्लेषण किया जा रहा है कि वर्तमान में भर / राजभर राजपूत समुदाय भारशिव क्षत्रिय / भारशिव राजपूत समुदाय के वंशज हैं , जो अपने मूल की शुरुआत से ही विदेशी विरोधी थे। हमारी स्वतंत्रता से 15 अगस्त , 1947 तक १५० ई.पू. एकमात्र…
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